छोटी -छोटी बातें बड़ा फर्क डालती हैं

 एक व्यक्ति सुबह-सुबह समुद्र के किनारे टहल रहा था।

उसने देखा कि जब लहरें सैकड़ों तारामछली को किनारे पर लाती हैं, तो लहरों के पीछे हटने पर वे धूप में मर जाती हैं।

लहरें वापस आ गईं, और तारामछली अभी भी जीवित थीं।

वह आदमी कुछ कदम आगे बढ़ा, उसने एक तारामछली उठाई और उसे पानी में फेंक दिया।

वह बार-बार ऐसा करता रहा।

उसकी हरकतों से हैरान एक और शख्स उसका पीछा कर रहा था।

वह आदमी उसके पास गया और पूछा, "तुम क्या कर रहे हो?" "यहां सैकड़ों स्टारफिश हैं।

 आपको क्या लगता है कि आप कितने लोगों को बचा सकते हैं? इससे क्या फर्क पड़ेगा?" दूसरे आदमी ने जवाब दिया।

उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया, कुछ कदम आगे बढ़ा, एक और तारामछली उठाई, उसे पानी में फेंक दिया, और कहा, " इससे इस एक मछली को तो फर्क पड़ता है ।

"ऐसा करने से हमें क्या फर्क पड़ रहा है? बड़ा हो या छोटा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता," उन्होंने जारी रखा।

"यदि हम सभी एक छोटा सा अंतर करते हैं, तो यह अंत में एक बड़ा अंतर पैदा करेगा।"

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एक बाप और बेटे की कहानी

*एक बाप और बेटे की कहानी,इस कहानी को पूरा पढ़िए और समझिए* एक बाप अदालत में दाखिल हुआ ताकि अपने बेटे की शिकायत कोर्ट में कर सके।  जज साहब ने पूछा, आपको अपने बेटे से क्या शिकायत है। बूढ़े बाप ने कहा, की मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के हिसाब से हर महीने का खर्च मांगना चाहता हू।  जज साहब ने कहा, वो तो आपका हक है। इसमें सुनवाई की क्या जरूरत है। आपके बेटे को हर महीने, खर्च देना चाहिए। बाप ने कहा की मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी हम हर महीना अपने बेटे से खर्चा लेना चाहते है वो चाहे कम का ही क्यों न हो। जज साहब आश्चर्यचकित होकर, बाप से कहने लगे, आप इतने मालदार हो तो आपको बेटे से क्यों पैसे की क्या आवश्यकता है।  बाप ने अपने बेटे का नाम और पता देते हुए, जज साहब से कहा, की आप मेरे बेटे को अदालत में बुलाएंगे तो आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा। जब बेटा अदालत में आया तो जज साहब ने बेटे से कहा, कि आपके पिता जी, आपसे हर महीना खर्चा लेना चाहते हैं। चाहे वह भले कम क्यों न हो।  बेटा भी जज साहब की बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गया कहने लगा। मेरे पिता जी बहुत अमीर हैं, उनके पास पै...

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