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बंदर ने चुराया लड्डू

बच्चों की कहानी मिष्टी बहुत ही प्यारी सी बच्ची है जो अभी बहुत छोटी है। वह अपने खिलौनों से कम खेलती है और घर की चीजों से ज्यादा खेलती है। उसके सामने जब भी कोई कुछ खाने बैठता है तो वह थाली अपनी ओर खींच लेती है। यह देखकर उसकी मां, दादी और दादा सभी हंस पड़ते हैं। उसकी उम्र के आसपास के कुछ बच्चे उसके साथ खेलने आते हैं और वह उन्हें अपनी गोद में लेकर घूमते है। मिष्टी अभी चलना नहीं जानती, लेकिन वह उछलती-कूदती है। उसकी मां उसे प्यार से मिष्टू बुलाती है। मिष्टी के घर के बगल के पेड़ों पर कई बंदर आते हैं, और कभी-कभी वह अपने दादाजी के साथ दूर से उनके साथ खेलती है। एक दिन मिष्टी के घर पर में एक पूजा हुआ जिसमें बहुत सारे मिठाई भी आया था। मिष्टी को लड्डू की थाली बहुत पसंद थी और वह खुशी-खुशी उन्हें खा रही थी कि तभी एक छोटा बंदर आया और उसके हाथ से एक लड्डू छीन लिया। मिष्टी जोर-जोर से रोने लगी और घर के सभी लोग यह देखने के लिए बाहर आ गए कि क्या हुआ है। मिष्ठी ने लड्डू की थाली पकड़ रखी थी और बंदर पास में बैठा था। जैसे ही उसके दादा ने एक छड़ी लायी, बंदर थाली से एक लड्डू ले गया और भाग गया, छत पर चढ़ गया और म...

सुंदर कौन है ?

सीमा पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी । पढ़नेलिखने में बहुत कमजोर थी । बस उस की एक ही विशेषता थी की वह दिखने में सुंदर थी, इसलिए सब उस की सुंदरता की तारीफ करते थे । सीमा को इस बात का घमंड हो गया और वह ऐसी लड़कियों से नफरत करने लगी, जो सुंदरता में कुछ कम थी । उसे सब से अधिक वंदना से नफरत थी, क्योंकि उस का रंग कुछ काला था । वह हमेशा उसे 'काली बिल्ली' कह कर चिढ़ाती थी । लेकिन वंदना का स्वभाव इतना अच्छा था कि वह उसे कभी कुछ न कहती । वंदना बड़ी भोली भाली लड़की थी । पढ़ने लिखने में बड़ी होशियार थी । सभी अध्यापिकाएं उसे बहुत प्यार करती थी । घर पर भी माँ उस से बहुत खुश थी । हर काम में माँ को सहयोग देती । सभी काम वह मन लगा का करती थी । वह बड़ी बड़ी सफाई पसंद थी इसलिए हमेशा साफसुथरी भी रहती थी । सीमा सारे दिन घर से बाहर खेला करती, अर्द्धवार्षिक परीक्षा निकट आ गई, लेकिन उसे तो किसी बात की चिंता नहीं थी । एक दिन सीमा सवेरे अपने घर से बाहर निकली । उस के पापा नई गेंद लाए थे, इसलिए वह बहुत खुश थी । वह सीधी अपनी एक सहेली दिव्या के घर गई । दिव्या उस समय अपने घर की सफाई करने मे...

एक बाप और बेटे की कहानी

*एक बाप और बेटे की कहानी,इस कहानी को पूरा पढ़िए और समझिए* एक बाप अदालत में दाखिल हुआ ताकि अपने बेटे की शिकायत कोर्ट में कर सके।  जज साहब ने पूछा, आपको अपने बेटे से क्या शिकायत है। बूढ़े बाप ने कहा, की मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के हिसाब से हर महीने का खर्च मांगना चाहता हू।  जज साहब ने कहा, वो तो आपका हक है। इसमें सुनवाई की क्या जरूरत है। आपके बेटे को हर महीने, खर्च देना चाहिए। बाप ने कहा की मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी हम हर महीना अपने बेटे से खर्चा लेना चाहते है वो चाहे कम का ही क्यों न हो। जज साहब आश्चर्यचकित होकर, बाप से कहने लगे, आप इतने मालदार हो तो आपको बेटे से क्यों पैसे की क्या आवश्यकता है।  बाप ने अपने बेटे का नाम और पता देते हुए, जज साहब से कहा, की आप मेरे बेटे को अदालत में बुलाएंगे तो आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा। जब बेटा अदालत में आया तो जज साहब ने बेटे से कहा, कि आपके पिता जी, आपसे हर महीना खर्चा लेना चाहते हैं। चाहे वह भले कम क्यों न हो।  बेटा भी जज साहब की बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गया कहने लगा। मेरे पिता जी बहुत अमीर हैं, उनके पास पै...