मेहनत का फल
प्रेरणादायक कहानी
एक बार दो दोस्त थे जिनकी दोस्ती अवश्य थी, लेकिन उनके विचार और दृष्टिकोण अलग थे।
एक आलसी था और हमेशा भाग्य के भरोसे रहता था, लगातार भगवान से बिना मेहनत के सब कुछ देने की प्रार्थना करता था।
दूसरा मेहनती था, मूर्तियां बनाता था और उससे जीविकोपार्जन करता था।
पहला मित्र दुनिया के प्रत्येक आयाम को नकारात्मक दृष्टि से देखता, तो दूसरा सकारात्मकता से भरा था।
एक दिन दोनों दोस्त जंगल से गुजर रहे थे, तभी रास्ते में उन्हें एक खूबसूरत गुलाबी पत्थर दिखाई दिया। पहले मित्र ने इसे भगवान के प्रतीक के रूप में देखा और प्रार्थना और आशीर्वाद मांगने लगा।
दूसरे दोस्त ने ध्यान से पत्थर की जांच की, उसे उठाया और घर ले गया।
जल्द ही, उसने पत्थर को भगवान की लुभावनी मूर्ति में बदल दिया।
जिसने भी इस सुंदर कला को देखा उसने मूर्तिकार के प्रतिभा की प्रशंसा की।
एक भक्त ने मूर्ति को उच्च कीमत पर खरीदा और मूर्तिकार ने इससे अच्छी आय अर्जित की।
एक दिन दोनों मित्र मिले और एक-दूसरे का हालचाल पूछा।
पहले मित्र ने अपना दुख और कष्ट बताया, लेकिन दूसरे मित्र ने प्रगति और सुख की खबर साझा की।
पता चला कि पहला दोस्त मेहनत के बजाय किस्मत पर भरोसा करता था, जबकि दूसरे दोस्त को मेहनत पर भरोसा था और मानता था कि सफलता इसी से मिलती है।
जैसा कि कहा जाता है, 'आप जो बोते हैं वही काटते हैं'।
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