दोस्ती की परख


 एक बार की बात है, एक बकरी थी।

वह अपने गांव में खुशी से रहती थी।

वह बहुत मिलनसार थी और उसके कई बकरी मित्र थे।

उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी।

वह सबसे बात करती थी और सबको अपना दोस्त मानती थी।

सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन एक दिन बकरी बीमार पड़ गई और दिन-ब-दिन कमजोर होने लगी।

अब वह पूरा दिन घर पर ही बिताती थी।

अपने लिए बचाकर रखा खाना भी खत्म हो रहा था।

एक दिन उसकी बकरी की कुछ सहेलियाँ उसके स्वास्थ्य के बारे में पूछने आयीं, और बकरी उन्हें देखकर बहुत खुश हुई।

उसने सोचा कि वह अपनी सहेलियों से कहेगी कि कुछ दिन और मेरे लिए खाना ले आओ।

लेकिन, वे बकरियाँ अंदर आने से पहले उसके घर के बाहर रुक गईं और उसके आँगन की घास खाने लगीं।

यह देखकर बकरी को बुरा लगा और उसे एहसास हुआ कि उसने अपने जीवन में क्या गलती की है।

 अब वो सोचने लगी कि काश! हर किसी को अपने जीवन का हिस्सा व दोस्त बनाने से पहले उसने उन्हें थोड़ा परख लिया होता है,

 तो अब इस बीमारी में उसकी मदद के लिए कोई तो होता।

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एक बाप और बेटे की कहानी

*एक बाप और बेटे की कहानी,इस कहानी को पूरा पढ़िए और समझिए* एक बाप अदालत में दाखिल हुआ ताकि अपने बेटे की शिकायत कोर्ट में कर सके।  जज साहब ने पूछा, आपको अपने बेटे से क्या शिकायत है। बूढ़े बाप ने कहा, की मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के हिसाब से हर महीने का खर्च मांगना चाहता हू।  जज साहब ने कहा, वो तो आपका हक है। इसमें सुनवाई की क्या जरूरत है। आपके बेटे को हर महीने, खर्च देना चाहिए। बाप ने कहा की मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी हम हर महीना अपने बेटे से खर्चा लेना चाहते है वो चाहे कम का ही क्यों न हो। जज साहब आश्चर्यचकित होकर, बाप से कहने लगे, आप इतने मालदार हो तो आपको बेटे से क्यों पैसे की क्या आवश्यकता है।  बाप ने अपने बेटे का नाम और पता देते हुए, जज साहब से कहा, की आप मेरे बेटे को अदालत में बुलाएंगे तो आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा। जब बेटा अदालत में आया तो जज साहब ने बेटे से कहा, कि आपके पिता जी, आपसे हर महीना खर्चा लेना चाहते हैं। चाहे वह भले कम क्यों न हो।  बेटा भी जज साहब की बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गया कहने लगा। मेरे पिता जी बहुत अमीर हैं, उनके पास पै...

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