नुकसान का ना करे मातम।

प्रेरणादायक कहानी



व्यापार में भारी नुकसान होने के कारण आकाश उदास बैठा था। 
उसने बैंक से कर्ज लिया था, लेकिन घाटा होने के कारण वह उसका भुगतान नहीं कर पा रहा था। 
उसे डर था कि बैंक उस पर दबाव डालना शुरू कर देगा, और उसे नहीं पता था कि उसे आगे क्या करना चाहिए। 
जिस बिजनेस में उन्हें घाटा हुआ था, उसे फिर से शुरू करने की हिम्मत नहीं थी।

ये सब विचार उसे व्याकुल कर रहे थे, और वह बेचैन हो रहा था। 
एक दिन उसका दोस्त परेश उससे मिलने आया। 
परेश ने जैसे ही आकाश को देखा तो उससे पूछा कि उसे क्या परेशान कर रहा है। 
आकाश ने अपनी चिंताओं को छिपाने की कोशिश की और कहा कि यह व्यापार में मामूली झटका था।

लेकिन परेश समझ गया था कि आकाश को कोई गंभीर बात परेशान कर रही है। 
इसलिए उन्होंने आकाश से अपनी समस्या साझा करने का आग्रह किया। 
आकाश ने फिर खुल कर उसे सब कुछ बता दिया।

परेश ने ध्यान से सुना और फिर आकाश से पूछा, "अगर तुम मेरी जगह होते तो क्या करते?"

कुछ देर सोचने के बाद परेश ने जवाब दिया, "अगर मैं तुम्हारी जगह होता, तो मुझे अपनी असफलता का पछतावा नहीं होता। 
इसके बजाय, मैं सोचता कि आगे क्या करना है। 
अगर आप अपने नुकसान के बारे में सोचते रहते हैं तो आप आगे नहीं बढ़ सकते।" "

परेश ने सुझाव दिया कि आकाश को शून्य से एक नया व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचना चाहिए। 
आकाश झिझक रहा था और उसने परेश से कहा कि उसमें ऐसा करने की हिम्मत नहीं है।

जिस पर परेश ने जवाब दिया, "यह समझ में आता है कि आप एक और नुकसान का सामना करने से डरते हैं, लेकिन आप अपने डर को अपने ऊपर हावी नहीं होने दे सकते। आपको अतीत के बारे में चिंता करने के बजाय यह सोचने की जरूरत है कि अब आप क्या कर सकते हैं। यह सही है की तुम्हें नुकसान हुआ है लेकिन तुम्हें तजुर्बा भी मिला है।"

परेश की सलाह ने आकाश को एक नया नजरिया दिया और वह सकारात्मक सोचने लगा। 
उन्होंने महसूस किया कि सफल होने के लिए आगे बढ़ना और सुनियोजित जोखिम उठाना आवश्यक है। 
नए दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ, आकाश ने नए व्यापारिक विचारों की खोज शुरू की और अंततः एक सफल उद्यम शुरू किया। 
परेश के प्रोत्साहन के शब्दों ने आकाश को असफलता के अपने डर से उबरने और उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ने में मदद की थी


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एक बाप और बेटे की कहानी

*एक बाप और बेटे की कहानी,इस कहानी को पूरा पढ़िए और समझिए* एक बाप अदालत में दाखिल हुआ ताकि अपने बेटे की शिकायत कोर्ट में कर सके।  जज साहब ने पूछा, आपको अपने बेटे से क्या शिकायत है। बूढ़े बाप ने कहा, की मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के हिसाब से हर महीने का खर्च मांगना चाहता हू।  जज साहब ने कहा, वो तो आपका हक है। इसमें सुनवाई की क्या जरूरत है। आपके बेटे को हर महीने, खर्च देना चाहिए। बाप ने कहा की मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी हम हर महीना अपने बेटे से खर्चा लेना चाहते है वो चाहे कम का ही क्यों न हो। जज साहब आश्चर्यचकित होकर, बाप से कहने लगे, आप इतने मालदार हो तो आपको बेटे से क्यों पैसे की क्या आवश्यकता है।  बाप ने अपने बेटे का नाम और पता देते हुए, जज साहब से कहा, की आप मेरे बेटे को अदालत में बुलाएंगे तो आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा। जब बेटा अदालत में आया तो जज साहब ने बेटे से कहा, कि आपके पिता जी, आपसे हर महीना खर्चा लेना चाहते हैं। चाहे वह भले कम क्यों न हो।  बेटा भी जज साहब की बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गया कहने लगा। मेरे पिता जी बहुत अमीर हैं, उनके पास पै...

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