कर्तव्य और उत्तरदायित्व

प्रेरणादायक कहानी


अपने आस-पास के लोगों से कर्तव्य और जिम्मेदारी की अपेक्षा रखना मानव स्वभाव है। 

हम अक्सर उम्मीद करते हैं कि अन्य लोग उसी स्तर की जिम्मेदारी और दायित्व को बनाए रखेंगे, जिसे हम खुद बनाए रखने का प्रयास करते हैं। 

लेकिन क्या हमने कभी यह सोचा है कि क्या हम सच में अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को पूरा कर रहे हैं?

अंग्रेजी ऑनर्स की परीक्षा के लिए मधुबनी केंद्र जाने के दौरान मैंने खुद को इस प्रश्न पर विचार करते हुए पाया।

मैंने अपनी परीक्षा की अवधि के लिए अपनी चचेरी बहन गुड्डी के साथ रहने का फैसला किया था। 

जब मैं पढ़ने बैठी तो मैंने गुड्डी को अपनी नौकरानी से घर की साफ-सफाई के बारे में बात करते हुए सुना। "सोफे पर सारी धूल और मेज के नीचे कचरा देखो। और कांच पर लगे वो दाग! तुम्हें इस घर को अपना मानना ​​चाहिए और इसे ठीक से साफ करना चाहिए," उसने डांटा।

अगले दिन नौकरानी काम पर नहीं आई। गुड्डी ने मुझसे कहा कि वह कल आएगी तो सफाई कर लेगी।

दूसरे दिन मालूम पड़ा कि बाई आज भी नहीं, कल आएगी। गुड्डी ने बस कंधा उचकाया और खुद ही फर्श पर झाडू लगाने लगी। "अगर वह नहीं आती है, तो हमें बस इसे स्वयं करना होगा," कल बाई आएगी तो सब अच्छे से करेंगी ही न। वह क्या करेगी नहीं तो आकर !

मैं सोच में पड़ गई कि यह किसका घर था, मेरी बहन का या नौकरानी का? घर को साफ रखने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या मेरी बहन सचमुच इस घर को अपना मान रही थी? ये सारे सवाल थे जो मेरे दिमाग में घूम रहे थे।

दूसरों से अपने कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों को निभाने की अपेक्षा करना आसान है, लेकिन यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि हमें भी अपने दायित्वों को पूरा करना है। 

यह केवल दूसरों से अपनी भूमिका निभाने की अपेक्षा करने के बारे में नहीं है; यह हमारी भूमिका निभाने के बारे में भी है। केवल तभी हम वास्तव में कर्तव्य और जिम्मेदारी के मूल्यों को बनाए रख सकते हैं, जिसकी हम अक्सर दूसरों से मांग करते हैं।

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एक बाप और बेटे की कहानी

*एक बाप और बेटे की कहानी,इस कहानी को पूरा पढ़िए और समझिए* एक बाप अदालत में दाखिल हुआ ताकि अपने बेटे की शिकायत कोर्ट में कर सके।  जज साहब ने पूछा, आपको अपने बेटे से क्या शिकायत है। बूढ़े बाप ने कहा, की मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के हिसाब से हर महीने का खर्च मांगना चाहता हू।  जज साहब ने कहा, वो तो आपका हक है। इसमें सुनवाई की क्या जरूरत है। आपके बेटे को हर महीने, खर्च देना चाहिए। बाप ने कहा की मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी हम हर महीना अपने बेटे से खर्चा लेना चाहते है वो चाहे कम का ही क्यों न हो। जज साहब आश्चर्यचकित होकर, बाप से कहने लगे, आप इतने मालदार हो तो आपको बेटे से क्यों पैसे की क्या आवश्यकता है।  बाप ने अपने बेटे का नाम और पता देते हुए, जज साहब से कहा, की आप मेरे बेटे को अदालत में बुलाएंगे तो आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा। जब बेटा अदालत में आया तो जज साहब ने बेटे से कहा, कि आपके पिता जी, आपसे हर महीना खर्चा लेना चाहते हैं। चाहे वह भले कम क्यों न हो।  बेटा भी जज साहब की बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गया कहने लगा। मेरे पिता जी बहुत अमीर हैं, उनके पास पै...

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