सफलता के लिए एकजुटता का महत्व।
प्रेरणादायक कहानी
यदि दुनिया में या किसी देश में प्रगति हो रही है, तो उसे जरूर देखना चाहिए जरूर उसके पीछे उनका अच्छा टीम वर्क होगा ।
हंस सोच में पड़ गया । इन्होनें चूल्हा भी जला लिया है । सब कर्मशील हैं, मुझे तो यह खा ही जायेंगे तो हंस बोला - अगर मैं आपको धन दे दूं तो मुझे छोड़ दोगे ।
आदमी बोला - हां, छोड़ देंगे ।
हंस कहने लगा मेरे साथ चलो मैं तुम्हें धन देता हूं ।
हंस उन को थोड़ी दूर ले गया और चोंच से इशारा किया और कहा कि यहां से निकाल लो ।
उन्होंने गढ्ढा खोदा और वहां से धन निकाल लिया ।
आदमी हंस की सलाह के लिए आभारी था और उसे धन्यवाद दिया।
अब उनके घर में किसी चीज की कमी नहीं थी ।
पड़ोसी ने देखा कि इस परिवार के पास ऐसी कौन सी चीज आ गयी जो इन के पास इतना कुछ आ गया ।
उसने छोटे लड़के को बुला कर सारी बात पूछ ली कि पैसा कहाँ से आया है ।
उनके भी दो बच्चे थे । उन्होंने भी ऐसी योजना बनाई और चल दिये ।
उन्होंने भी उसी वृक्ष के नीचे डेरा लगा लिया ।
बीबी ने भी कहा कि मैं थक चुकी हूं । जैसे-तैसे पानी लकड़ी इकट्ठी हो गई और पानी गर्म होने लगा ।
हंस फिर आया और बोला तुम्हारे पास खाने को तो नहीं है तो फिर पानी गर्म कर रहे हो ।
पड़ोसी बोला तुझे मार कर खायेंगे ।
हंस मुस्कुरा उठा और बोला - मारने वाले तो तीन दिन पहले आये थे ।
तुम अपना समय खराब मत करो ।
जिन्होंने दूसरों को जितना होता है वे खुद नहीं लड़ते ।
पड़ोसी अचंभित रह गया और उसे हंस के शब्दों में सच्चाई का एहसास हुआ।
संसार का नियम भी ऐसा ही है । जिन लोगों ने तरक्की करनी है वे मिलकर चलते हैं और आज भी संसार में उन का ही बोल -बाला है । जो आपसी तालमेल में रहते हैं वे ही समाज रूपी हंस को जीत सकते हैं ।"
चाहे घर में एक टीम हो या एक साथ काम करने वाले बाहरी लोगों का समूह, जहाँ भी अच्छे समूह बनते हैं, प्रगति होती है।
ऐसा बार-बार देखा गया है। जो लोग आपके आसपास प्रगति पसंद करते हैं वे एक साथ काम करते होंगे और उनका टीम वर्क भी अच्छा होगा।
एक बार की बात है, एक गरीब परिवार था।
एक बार की बात है, एक गरीब परिवार था।
उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था और गुज़ारा करने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
माता-पिता के दो बच्चे थे, और एक दिन उन्हें एहसास हुआ कि उनके गाँव में काम मिलना मुश्किल है।
उन्होंने बेहतर अवसरों की तलाश में गाँव छोड़ने का फैसला किया और एक दिन गांव छोड़कर चल दिये ।
रात का समय था, और सड़क घने जंगल के बीच से थी।
रात का समय था, और सड़क घने जंगल के बीच से थी।
उन्हें एक वृक्ष मिला और उन्होंने वहीं रात बिताने का फैसला किया।
उस आदमी ने अपने एक बेटे को लकड़ी इकट्ठा करने के लिए भेजा, दूसरे बेटे को पानी इकट्ठा करने के लिए और अपनी पत्नी को चूल्हा बनाने के लिए कहा।
उन्होंने वृक्ष के आसपास के क्षेत्र को भी साफ कर दिया ताकि उनके लिए इसे और अधिक आरामदायक बनाया जा सके।
उन चारों ने एक साथ काम किया, और जल्द ही, चूल्हे में आग लग गई और पानी उबलने लगा।
उन चारों ने एक साथ काम किया, और जल्द ही, चूल्हे में आग लग गई और पानी उबलने लगा।
जैसे ही वे आग के चारों ओर बैठे, एक हंस उनके ऊपर के वृक्ष पर बैठ गया और चहकने लगा।
उस हंस ने आदमी की ओर देखा और मन ही मन सोचने लगा, "यह कैसा मूर्ख हैं इन्होनें चूल्हा तो जला दिया मगर इन के पास पकाने को तो है ही नहीं कुछ भी।"
हंस ने उस आदमी से पूछा, "तुम्हें क्या पकाना है?" उस आदमी ने जवाब दिया, "अगर मेरे पास पकाने के लिए कुछ होता, तो मैं पहले ही बना लेता।"
हंस ने उस आदमी से पूछा, "तुम्हें क्या पकाना है?" उस आदमी ने जवाब दिया, "अगर मेरे पास पकाने के लिए कुछ होता, तो मैं पहले ही बना लेता।"
हंस ने फिर पूछा, "अगर तुम्हारे पास पकाने के लिए कुछ नही तो तुम क्या करोगे?"
उस आदमी ने जवाब दिया, "बेशक मैं तुम्हे पकाऊँगा।"
हंस हँसी और बोली, "तुम कितने मूर्ख हो। तुमने चूल्हे में आग लगा ली है, और पानी भी उबलने लगा हैं लेकिन तुम्हारे पास पकाने के लिए कुछ नहीं है और सोचते हो कि तुम मुझे मार कर खाओगे" ।
हंस हँसी और बोली, "तुम कितने मूर्ख हो। तुमने चूल्हे में आग लगा ली है, और पानी भी उबलने लगा हैं लेकिन तुम्हारे पास पकाने के लिए कुछ नहीं है और सोचते हो कि तुम मुझे मार कर खाओगे" ।
अगर तुम्हारे पास पकाने के लिए कुछ होता, तो तुम मुझे नहीं मार कर खाते परंतु तुमने इसके बारे में नहीं सोचा।" असली समस्या यह है कि आपके पास पकाने के लिए कुछ नहीं है।
फिर हंस बोला - मुझे क्यों मारोगे ?
फिर हंस बोला - मुझे क्यों मारोगे ?
आदमी बोला - हमारे पास न पैसा है और न ही सामान तो क्या करें ?
हंस सोच में पड़ गया । इन्होनें चूल्हा भी जला लिया है । सब कर्मशील हैं, मुझे तो यह खा ही जायेंगे तो हंस बोला - अगर मैं आपको धन दे दूं तो मुझे छोड़ दोगे ।
आदमी बोला - हां, छोड़ देंगे ।
हंस कहने लगा मेरे साथ चलो मैं तुम्हें धन देता हूं ।
हंस उन को थोड़ी दूर ले गया और चोंच से इशारा किया और कहा कि यहां से निकाल लो ।
उन्होंने गढ्ढा खोदा और वहां से धन निकाल लिया ।
आदमी हंस की सलाह के लिए आभारी था और उसे धन्यवाद दिया।
हंस उड़ गई।
आदमी वापस अपने गांव लौट गये और एक ही दिन में खूब मौज से रहने लग गए ।
अब उनके घर में किसी चीज की कमी नहीं थी ।
अब वे अपनी जरूरतों के प्रति अधिक जागरूक थे और आगे की योजना बनाना सुनिश्चित करते थे।
आखिरकार उन्हें काम भी मिल गया और वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम हो गए।
पड़ोसी ने देखा कि इस परिवार के पास ऐसी कौन सी चीज आ गयी जो इन के पास इतना कुछ आ गया ।
उसने छोटे लड़के को बुला कर सारी बात पूछ ली कि पैसा कहाँ से आया है ।
उनके भी दो बच्चे थे । उन्होंने भी ऐसी योजना बनाई और चल दिये ।
उन्होंने भी उसी वृक्ष के नीचे डेरा लगा लिया ।
पड़ोसी ने अपने बड़े लड़के को कहा - लकड़ी लाओ तथा छोटे लड़के को पानी लाने के लिए कहा परन्तु दोनों आनाकानी करने लगे ।
बीबी ने भी कहा कि मैं थक चुकी हूं । जैसे-तैसे पानी लकड़ी इकट्ठी हो गई और पानी गर्म होने लगा ।
हंस फिर आया और बोला तुम्हारे पास खाने को तो नहीं है तो फिर पानी गर्म कर रहे हो ।
पड़ोसी बोला तुझे मार कर खायेंगे ।
हंस मुस्कुरा उठा और बोला - मारने वाले तो तीन दिन पहले आये थे ।
तुम अपना समय खराब मत करो ।
घर जाओ तुम मुझे क्या मरोगे तुम तो आपस में ही लड़ रहे हो ।
जिन्होंने दूसरों को जितना होता है वे खुद नहीं लड़ते ।
पड़ोसी अचंभित रह गया और उसे हंस के शब्दों में सच्चाई का एहसास हुआ।
फिर उसने हंस से सलाह मांगी कि क्या करना चाहिए।
हंस ने उत्तर दिया, "आग जलाने से पहले आपको यह सोचना चाहिए था कि आपको क्या चाहिए। इसी तरह, जीवन में, आपको किसी कार्य को शुरू करने से पहले यह सोचना चाहिए कि आपको क्या करना है। तभी आप सफल होंगे।"
संसार का नियम भी ऐसा ही है । जिन लोगों ने तरक्की करनी है वे मिलकर चलते हैं और आज भी संसार में उन का ही बोल -बाला है । जो आपसी तालमेल में रहते हैं वे ही समाज रूपी हंस को जीत सकते हैं ।"
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