धैर्य और बुद्धिमानी
एक बार एक घने जंगल में एक शक्तिशाली शेर शिकार पर निकला।
अचानक उसके सामने एक चालाक लोमड़ी आ गई।
लोमड़ी ने सोचा कि उसके लिए कोई रास्ता नहीं है, लेकिन उसने उम्मीद नहीं खोई और अपनी जान बचाने के लिए एक चतुर योजना बनाई।
लोमड़ी ने तीखे शब्दों में शेर से कहा, "तुममें इतनी ताकत नहीं है कि तुम मुझे मार सको।"
शेर थोड़ा हैरान हुआ और बोला, "तुम ऐसा कैसे कह सकते हो?"
लोमड़ी ने ऊँची आवाज़ में कहा, "मैं तुम्हें सच-सच बताती हूँ।
भगवान ने मुझे इस जंगल और यहाँ रहने वाले सभी जानवरों का राजा बनाया है।
अगर तुम मुझे मारोगे तो यह भगवान की इच्छा के विरुद्ध होगा और तुम भी मर जाओगे। "
थोड़ी देर की खामोशी के बाद लोमड़ी ने कहा, "अगर तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है, तो मेरे साथ आओ और खुद देखो कि दूसरे जानवर मुझसे कितने डरे हुए हैं।"
शेर लोमड़ी के पीछे चलने को तैयार हो गया।
निडर लोमड़ी ने जंगल के रास्ते शेर का नेतृत्व किया, जो उसके पीछे-पीछे चल रहा था।
लोमड़ी के पीछे शेर को देखकर अन्य जानवर डर के मारे भाग खड़े हुए।
कुछ देर बाद लोमड़ी ने शेर से पूछा, "क्या अब तुम मुझ पर विश्वास करते हो?"
एक पल की चुप्पी के बाद शेर ने कहा, "आप सही कह रहे हैं।
आप जंगल के राजा हैं।"
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, हम अपनी बुद्धि का प्रयोग कर इससे निकलने का रास्ता निकाल सकते हैं।
हमारा मस्तिष्क एक कंप्यूटर नहीं है जो प्रोग्राम के आधार पर चलता है, बल्कि एक ऐसा उपकरण है जो किसी भी स्थिति को हमारे लाभ में बदलने में हमारी मदद कर सकता है।
यह हर समस्या का समाधान तलाशने की ताकत है, यह तभी संभव होगा जब हम विपरीत परिस्थितियाँ में भी अपना धैर्य बरकरार रखेंगे।
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