कर्ज और दहेज
प्रेरणादायक कहानी
एक बार की बात है, एक 15 साल का लड़का था जो उत्सुकता से अपने पिता के पास गया और कहा, "पिताजी, पिताजी, मेरी बहन के भावी ससुर और सास कल आ रहे हैं। उसके देवर जी ने अभी हमें फोन पर सूचना दी।"
उसकी बहन की हाल ही में एक अच्छे परिवार के एक अच्छे युवक से सगाई हुई थी।
हालाँकि, दीनदयाल, पिता, काफी समय से वहाँ उदास बैठे थे।
उसने अपने बेटे को धीमी आवाज़ में जवाब दिया, "हाँ, बेटा, उन्होंने कल फोन किया था कि वे एक-दो दिन में दहेज पर चर्चा करने आएंगे।
मुझे दहेज के बारे में आपसे गंभीर बातचीत करने की जरूरत है।"
दीनदयाल को अपनी बेटी के लिए योग्य लड़का खोजने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था और अब दहेज की मांग इतनी बढ़ गई थी कि वह इसे पूरा नहीं कर पा रहे थे।
उन्होंने आगे कहा, "अगर दहेज की मांग बहुत अधिक है, तो मैं इसे पूरा नहीं कर पाऊंगा। तब क्या होगा?" बोलते-बोलते उनकी आंखों में आंसू आ गए।
परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही थी।
इस खबर से दुल्हन भी मायूस नजर आई। बहरहाल, अगले दिन भावी ससुराल पहुंचे और सभी ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।
उनका भव्य स्वागत किया गया, और दीनदयाल की बेटी को इस अवसर के लिए सुंदर रूप से तैयार किया गया था।
कुछ समय साथ बिताने के बाद दूल्हे के पिता दीनदयाल की ओर मुड़े और बोले, "दीनदयाल जी, अब काम की बात हो जाए।"
ये शब्द सुनते ही दीनदयाल का हृदय धड़क उठा। उसने उत्तर दिया, "हां हां.. समधी जी.. जो आप हुकुम करें।"
दूल्हे का पिता दीनदयाल के पास झुक गया और उसके कान में फुसफुसाया, "दीनदयाल जी, मुझे दहेज के बारे में आपसे कुछ बात करनी है।" धड़कते दिल के साथ दीनदयाल जी बोले.., " बताईए समधी जी....जो आप को उचित लगे.. मैं पूरी कोशिश करूंगा ।"
दूल्हे के पिता ने दीनदयाल का हाथ पकड़ लिया और धीरे से कहा, "दीनदयाल जी, मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि आप कन्यादान में कुछ भी देगें या ना भी देंगे… थोड़ा देंगे या ज़्यादा देंगे.. मुझे सब स्वीकार है ।
पर कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत देना.. वो मुझे स्वीकार नहीं ।
क्योकि जो बेटी अपने बाप को कर्ज में डुबो दे वैसी "कर्ज वाली लक्ष्मी" मुझे स्वीकार नही ।
मुझे बिना कर्ज वाली बहू ही चाहिए.. जो मेरे यहाँ आकर मेरी सम्पति को दो गुना कर देगी ।
दीनदयाल को विश्वास नहीं हो रहा था कि वह क्या सुन रहे हैं। वह कृतज्ञता से अभिभूत थे और अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते थे।
उसने केवल अपना सिर हिलाया और अपनी आँखें पोंछ लीं। यह पूरे परिवार के लिए खुशी और राहत का क्षण था।
उस दिन से दोनों परिवार प्यार और सम्मान के बंधन में बंध गए।
यह एक सुंदर उदाहरण था कि कैसे दहेज जैसे एक पुरानी सामाजिक बुराई को मिटाया जा सकता है यदि लोग सही इरादों के साथ एक साथ आते हैं
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