एकता और समझदारी

प्रेरणादायक कहानी



ऊंचे आसमान में सफेद कबूतरों का झुंड उड़ रहा था। 
उन्हें अभी लंबा रास्ता तय करना था, और यात्रा उन पर भारी पड़ रही थी। 
सुबह से उड़ते-उड़ते थक रहे थे। 
सूरज तेज चमक रहा था, और भूख ने उन्हें जकड़ना शुरू कर दिया था। 
अचानक उन्हें नीचे जमीन पर बिखरे हुए चावल के कुछ दाने दिखाई दिए।

कबूतरों ने अपनी यात्रा जारी रखने से पहले थोड़ी देर रुककर  भोजन करने का फैसला किया। 
हालाँकि, उनमें से एक बूढ़े और बुद्धिमान कबूतर ने कुछ अजीब देखा। 
उसने इधर-उधर देखा और महसूस किया कि वहाँ कोई इंसान या घर नहीं थे, और उसने सोचा कि चावल कहाँ से आया है।

बुद्धिमान कबूतर ने दूसरों को चेतावनी दी कि वे नीचे जाकर चावल न खाएं क्योंकि कुछ गड़बड़ है। 
हालाँकि, किसी ने उसकी बात नहीं मानी और सभी कबूतर उड़ गए और चावल के दानों को चुगने लगे।

बहुत दिनों बाद उन्हें ऐसा स्वादिष्ट भोजन मिला था और वे बहुत खुश थे। 
एक बार भरपेट खा लेने के बाद, उन्होंने आगे उड़ने का निश्चय किया, लेकिन कुछ अप्रत्याशित हुआ। 
उन्होंने खुद को उड़ने में असमर्थ पाया।  
वे एक पक्षी पकड़ने वाले जाल में फंस गए थे, जो चावल के दानों के नीचे छिपा हुआ था।
उन्हें अपनी गलती पर पछतावा हुआ।

बूढ़ा कबूतर, जिसने दूसरों को चेतावनी दी थी, पीछे रह गया था और पूरे दृश्य को देख रहा था। 
उसने जब अपने साथियों को मुसीबत में देखा तो फौरन उड़ा और चारो ओर देखा।
दूर उसे चिड़ीमार आता दिखाई दिया।

बिना समय बर्बाद किए बुद्धिमान बूढ़ा कबूतर मदद की तलाश में उड़ गया। 

वह फौरन लौटा और अपने साथियों को बताया। सब वहाँ से निकलने का उपाय सोचने लगे।
इस बीच, बूढ़े कबूतर ने फंसे हुए पक्षियों को जाल से बचने का तरीका बताया। 
बूढ़े कबूतर ने कहा, दोस्तों, एकता में बड़ी शक्ति होती है। सब एक साथ उड़ोगे तो जाल तुम्हें रोक नहीं पाएगा।
उसने गिना - एक दो तीन। ........ उड़ो .....
सारे कबूतरों ने एक साथ जोर लगाया और जाल उनके साथ उठने लगा। जब तक चिड़ीमार वहाँ पहुँचा, तब तक जाल काफी ऊपर उठ चूका था। वह देखता ही रह गया और कबूतर जाल लेकर उड़ गए। बूढ़ा कबूतर सबसे आगे उड़ रहा था।
काफी देर उड़ने के बाद वे नीचे उतरे। वहाँ कबूतरों के दोस्त चूहे रहते थे।
उन्होंने उन्हें स्थिति के बारे में बताया और अपने फंसे हुए साथियों को मुक्त करने में उनकी मदद मांगी।
चूहों ने अपने तेज दातों से जाल काट दिया।
इस तरह बूढ़े कबूतर की समझदारी और साथ मिलकर काम करने से सभी कबूतर बच गए।"

कबूतरों ने उस दिन एक मूल्यवान सबक सीखा। 

उन्होंने महसूस किया कि उन्हें हमेशा पुराने और अनुभवी लोगों के ज्ञान को सुनना चाहिए, और जल्दी और आसानी से खाने के लालच में नहीं आना चाहिए। 

वे चूहे की मदद के लिए आभारी थे और उनकी दया को हमेशा याद रखने का वादा किया।

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एक बाप और बेटे की कहानी

*एक बाप और बेटे की कहानी,इस कहानी को पूरा पढ़िए और समझिए* एक बाप अदालत में दाखिल हुआ ताकि अपने बेटे की शिकायत कोर्ट में कर सके।  जज साहब ने पूछा, आपको अपने बेटे से क्या शिकायत है। बूढ़े बाप ने कहा, की मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के हिसाब से हर महीने का खर्च मांगना चाहता हू।  जज साहब ने कहा, वो तो आपका हक है। इसमें सुनवाई की क्या जरूरत है। आपके बेटे को हर महीने, खर्च देना चाहिए। बाप ने कहा की मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी हम हर महीना अपने बेटे से खर्चा लेना चाहते है वो चाहे कम का ही क्यों न हो। जज साहब आश्चर्यचकित होकर, बाप से कहने लगे, आप इतने मालदार हो तो आपको बेटे से क्यों पैसे की क्या आवश्यकता है।  बाप ने अपने बेटे का नाम और पता देते हुए, जज साहब से कहा, की आप मेरे बेटे को अदालत में बुलाएंगे तो आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा। जब बेटा अदालत में आया तो जज साहब ने बेटे से कहा, कि आपके पिता जी, आपसे हर महीना खर्चा लेना चाहते हैं। चाहे वह भले कम क्यों न हो।  बेटा भी जज साहब की बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गया कहने लगा। मेरे पिता जी बहुत अमीर हैं, उनके पास पै...

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